दिल्ली में आम आदमी पार्टी की लगातार तीन बार की जीत के बाद पार्टी ने देश के अन्य राज्यों में निकाय और पंचायत चुनावों में एंट्री मारी. इस बीच आम आदमी पार्टी ने गुजरात निकाय चुनावों में सूरत में जीत हासिल की. इस चुनाव में आप ने सीधे तौर पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया. आप के इस जीत के बाद यह सवाल उठना लाजिमी हो गया कि क्या अब आम आदमी पार्टी देश में भारतीय जनता पार्टी को सीधी टक्कर देगी या ये बस एक आम जीत है. दूसरी तरफ एआईएमआईएम ने भी गुजरात चुनावों में जीत हासिल की है.

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में तीन बार सरकार बनाई है. जिसमें उसने स्पष्ट रूप से कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया. दूसरी तरफ आप ने गुजरात निकाय चुनावों में सूरत में आम आदमी पार्टी को 23 सीटों पर जीत हासिल हुई और बीजेपी को 93 सीटों पर, लेकिन कांग्रेस का सूरत में खाता भी नहीं खुला.

दिल्ली में लोकसभा चुनाव में दो सीटों पर बीजेपी के बाद आम आदमी पार्टी दूसरे नंबर पर थी, वहीं जिन सीटों पर आप तीसरे नंबर पर थी वहां आप और कांग्रेस के वोटों का अंतर कुछ ज्यादा नहीं था. अब आम आदमी पार्टी के इन जीतों के बाद ये कयास लगाया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी देश में भारतीय जनता पार्टी का विकल्प बन कर उभर सकती है.

आम आदमी पार्टी ने अब उत्तर प्रदेश में भी होने वाले पंचायत चुनावों के लिए कमर कस ली है और दिल्ली से तमाम बड़े नेता यूपी में पार्टी को मजबूत करने में जुट गये हैं. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आप को प्रदेश में बड़ी जीत और अच्छी नींव देने में जुट गये हैं.

दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी बिहार विधानसभा चुनाव और गुजरात निकाय चुनाव में अहमदाबाद के 8 सीटों पर भी जीत हासिल की है. कांग्रेस के बजाय दूसरी पार्टियों की इन जीतों से देश में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं. अब इसका फैसला तो जनता के उपर छोड़ना ही वाजिब होगा.

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