उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में रोडवेज बसों में अब महिला चालक भी स्टेयरिंग थामेंगी और गियर लगाएंगी। परिवहन निगम के मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर में प्रदेश की कुल 19 युवतियों को पिंक बसों की ड्राइविंग के लिए तैयार किया जा रहा है। 25 फरवरी से इन युवतियों का प्रशिक्षण कानपुर में शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन के तहत महिलाओं को भारी वाहन चलाने के कोर्स पर भारत सरकार से अनुमति भी मिल चुकी है।

चयनित महिलाओं को पिंक बसों के संचालन के लिए कानपुर स्थित इंस्टीट्यूट में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इनके ड्राइविंग लाइसेंस भी परिवहन निगम ही बनवाएगा। पहले हल्के और फिर भारी वाहन का लाइसेंस बनवाया जाएगा। पहले चरण में जिन 19 युवतियों को चयनित किया गया।इस समूह के साथ कानपुर में ट्रेनिंग कर रही सोनिया ने बताया कि जब लड़कियां प्लेन और ट्रेन चला सकती हैं, तो बस क्यों नहीं चला सकती हैं? कौशल विकास मिशन के तहत होने वाली ट्रेनिंग से उत्साहित हूं।

अब जल्द ही बस चलाना चाहती हूं। इसके साथ ही मॉडल ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, कानपुर के प्रधानाचार्य एसपी सिंह का कहना है कि परिवहन विभाग ने महिला परिचालक तो हैं, लेकिन चालक नहीं थीं, अब इस योजना को भी सरकार ने मूर्त रूप देने की मंजूरी दे दी है। इससे महिला सवारियां खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी।

महिलाओं को दो चरणों में पहले चरण में 200 व दूसरे चरण में 400 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण करीब सात महीने चलेगा। इसके बाद इनको रोडवेज बस की स्टेयरिंग थमाई जाएगी। प्रदेश में होने वाले इस पहल से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही युवतियां खासी उत्साहित हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही युवतियों का मानना है कि जब लड़कियां ट्रेन हवाई जहाज चला सकती हैं, तो बस क्यों नहीं। बसों में महिला चालकों की नियुक्ति के पीछे सरकार की सबसे बड़ी मंशा महिला यात्रियों की सुरक्षा है। उनका मानना है कि बसों में महिला चालक व परिचालक होने से 1 बसों की महिला यात्री खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी।

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