एक दशक के दिग्गज अभिनेताओं देव आनंद का बोलने का अंदाज सबसे निराला था. उस समय देव साहब इंडस्ट्री के सबसे हैंडसम अभिनेताओं में से एक हुआ करते थे जिनके लिए अभिनेत्रियां भी उनकी दीवानी थीं. देव साहब को चाहने वाली अदाकाराओं की लिस्ट काफी लंबी है. वहीं, अदाकारा जाहिदा हुसैन भी देव साहब को पसंद करती थीं. और उनके अलावा न जाने कितनी साडी हसीनाएं और थी. वही जाहिदा के पिता अख्तर हुसैन नरगिस के भाई थे. इस तरह देखा जाए तो वो संजय दत्त की कजिन बहन लगती हैं. नरगिस की मां जद्दनबाई ने तीन शादियां की थीं. जद्दनबाई ने पहली शादी नरोत्तम दास खत्री से की थी जिन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर अपना नाम बच्ची बाबू रखा था.

वही उनके बेटे अख्तर हुसैन थे. इन्हीं अख्तर हुसैन की बेटी जाहिदा हुईं और जद्दनबाई की दूसरी शादी उस्ताद राशिद मीर खान से हुई. जिसके बाद उन्होंने तीसरी शादी मोहन बाबू से की. मोहन बाबू ने भी इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था. जद्दनबाई की तीसरी शादी से बेटी नरगिस हुई थीं. जाहिदा हुसैन की पहली मुख्य फिल्म साल 1968 में आई ‘अनोखी रात’ थी. इसके बाद जाहिदा ने साल 1970 में रिलीज हुई ‘प्रेम पुजारी’ की थी. उस दौरान देव आनंद के साथ आईं जाहिदा की ये फिल्म सुपरहिट रही. इसके बाद साल 1971 में जाहिदा की एक और फिल्म ‘गैम्बलर’ रिलीज हुई.

इसमें भी देव आनंद मुख्य भूमिका में थे. फिल्म में उन पर फिल्माया गया गाना ‘चूड़ी नहीं है ये मेरा दिल है’ काफी मशहूर हुआ था, ऊँ दिनों खबरों की मानें तो साल 1972 में देव आनंद ने फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के लिए जाहिदा को उनकी बहन का रोल ऑफर किया था लेकिन जाहिदा ने ये रोल करने से मना कर दिया था. वो पर्दे पर देव आनंद की बहन का किरदार नहीं करना चाहती थीं. बाद में ये रोल अभिनेत्री जीनत अमान ने निभाया. फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया था. लेकिन जाहिदा का ये फैसल तो आप समझ ही गए होंगे? खैर

वह अपने करियर में तीन फिल्में करने के बाद फिल्मी दुनिया से दूर हो गई थी. उन्होंने बिजनेसमैन केसरी नंदन सहाय से शादी कर ली और फिल्मों को अलविदा कह दिया. जाहिदा के दो बेटे हुए जिनमें से एक बेटे निलेश सहाय हैं जो बड़े पर्दे पर दिख चुके हैं. निलेश ने साल 2011 में रिलीज हुई गणेश आचार्य की फिल्म ‘एंजेल’ से डेब्यू किया था. और कुछ खासा कमाल तो नहीं कर पायें लेकिन खुद को अजमाया तो ज़रूर था, लेकिन देव बाबु की फैन्स की फेहरिस्त में दिनों दिन नाम बढ़ते रहे हो हसीनाओं का तांता लगता रहा.

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