central government planning

जो एप्स लोगों को ऑनलाइन कर्ज दे रही है |अब उन पर केंद्र सरकार (Central Government) अपना कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है | इसके साथ ही सरकार नए विनियामक विकल्पों की भी खोजबीन में जुटी हुई है, जो जबरदस्ती वसूली प्रक्रिया के ऊपर रोक लगा सकते हैं | इसी के साथ ब्याज दरों को कम करना और कर्ज के जंजाल में फंसने वाले लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आवश्यक करने पर सरकार का इसपर जोर दे रही है | आपको बताते चलें कि ऐसे मामलों में भारतीय रिजर्व बैंक एक रिपोर्ट तैयार कर रही है, जो इस साल के अप्रैल मध्य तक सभी लोगों के सामने आ जाएगी |

इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार (Central Government) इस बात को सुनिश्चित करेगी कि ऐसी कंपनियों के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे का इस्तेमाल करें या नया कानून लेकर आए | तथा इन कंपनियों को कानूनी प्रावधान के तहत इसलिए लाया जा रहा है, ताकि कर्ज देने से पहले यह कंपनियां खुद का रजिस्ट्रेशन करा लें और कंपनी में ही एक विवाद समाधान तंत्र बन जाए | एक अधिकारी के नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यह पाया गया है, कि इनमें से कुछ ऑनलाइन फ्रॉड कंपनियां हैं |

जो 300 फ़ीसदी वार्षिक ब्याज दर के रूप मैं उच्च शुल्क लेती हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है | इसी के साथ आप लोगों को आगाह कर दें कि लोगों को अपनी और आकर्षित करने वाली यह सारी कंपनियां हैं, जो आपको लोन देती हैं | बिना किसी परिश्रम के तत्काल कोलेस्ट्रोल फ्री लोन जैसी सुविधाएं देती है, लेकिन कर्ज देने की प्रक्रिया में यह कंपनी निजी डेटा इकट्ठा कर लेती हैं और लोगों को ब्लैकमेल करती हैं. पिछले साल हुई आत्महत्या के मामलों में ऐसी कई कंपनी को इन केसों में देखा गया है |

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