dal rate increased

भारत सरकार के वाणिज्य विभाग की एक अधिसूचना के अनुसार वित्त वर्ष 2021-2022 के लिए 4 लाख टन अरहर दाल और 1.5 लाख टन मूंग दाल के आयात का सालाना कोटा अधिसूचित कर दिया है। इसमे ये कहा गया है कि मिलर्स, रिफाइनर के व्यापारियों को आयात की अनुमति दी जाएगी। इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन ने इस निर्णय पर खुशी जताई है इस कोटे के अनिसार ये कोटा किसी भी द्विपक्षीय/क्षेत्रीय समझौते के तहत सरकार की आयात प्रतिबद्धताओं पर लागू नहीं होंगे | दालों के भाव (dal rate increased) की अगर बात करें तो लगातार बढ़ते जा रहे है।

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन ने कहा कि सरकार के इस निर्णय के कारण भारत मे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा साथ ही साथ बढ़ती कीमतों पर भी नियत्रंण देखने को मिलेगा। आपको ये भी बता दें कि इसका आवंटन एल्गोरिथम आधारित लॉटरी प्रणाली के माध्यम से आवेदकों की पूर्व-निर्धारित संख्या के लिये समान रूप से आवंटित किया जायेगा. वही यदि साबुत उड़द जिसे हम काली मटका दाल के नाम से भी जानते है, इस दाल के भाव (dal rate increased) भी लगातार बढ़ रहे है। म्यांमार मे सैन्य तख्तापलट के कारण उड़द दाल (काली मटका) आयात के मुख्य स्रोत म्यांमार से आपूर्ति को लेकर चिंताएं हैं. ये भी एक बड़ा कालण है कि देश में उड़द की कीमतें आसमान छू रही हैं.

आपको बता दें कि म्यांमार से ही सबसे ज्यादा उड़द का आयात किया जाता है. म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता के चलते व्यापारी चिंतित थे और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार से इस पर निर्णय की मांग की थी| तुअर दाल की आपूर्ति को लेकर भी चिंताए बनी हुई है, जिसकी अच्छी गुणवत्ता म्यांमार से आती है। देश में दालों के भाव (dal rate increased) अस्थिर बने हुए है।

देश मे अनियमित बारिश के कारण उड़द की फसल खराब हो गई, जिससे उड़द की कीमतों में धीरे-धीरे उछाल देखने को मिल रहा है. उड़द की दाल बनाने के लिए साबुत उड़द कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होती है उड़द दाल के भाव वर्तमान में एमएसपी से 25 फीसद अधिक है. साबुत उड़द 75 रुपये/ किलो से लेकर 80 रुपये किलो तक का कारोबार कर रही है जबकि इसका एमएसपी 60 रुपये किलोग्राम है.

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