drdo bullet proof jacket

भारतीय सेना (Indian Army) में थल, जल और वायु तीनों सेनाओं में कानपुर स्थित डीआरडीओ (DRDO) का नाम काफी मशहूर है। क्योंकि कानपुर स्थित डीआरडीओ अपने अत्याधुनिक निर्माण से सेना के तीनों अंगों की लगातार सहायता करता रहता है। इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) लैब डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई), कानपुर ने भारतीय सेना की गुणात्मक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए 9.0 किलोग्राम वजनी हल्के वजन वाली बुलेट प्रूफ जैकेट विकसित की है ।

फ्रंट हार्ड आर्मस पैनल (एफएचएपी) जैकेट का परीक्षण टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला (टीबीआरएल), चंडीगढ़ में किया गया और इस परीक्षण ने प्रासंगिक बीआईएस मानकों को पूरा किया। इस महत्वपूर्ण विकास का महत्व इस तथ्य में निहित है कि इस बुलेट प्रूफ जैकेट के वजन में कमी का प्रत्येक ग्राम युद्धक्षेत्र में बने रहने के लिहाज से सैनिक का आराम बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। इस तकनीक से मध्यम आकार के बुलेट प्रूफ जैकेट का वजन 10.4 से 9.0 किलोग्राम तक कम हो जाता है । इस उद्देश्य के लिए प्रयोगशालाओं में बहुत विशिष्ट सामग्री और प्रक्रमण प्रौद्योगिकियों का विकास किया गया है ।

DRDO bullet proof jacket

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ (DRDO )के वैज्ञानिकों और उद्योग को हल्के वजन वाली बुलेट प्रूफ जैकेट विकसित करने के लिए बधाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि इसी जैकेट से सैनिक युद्धक्षेत्र में और अधिक आराम महसूस कर पाएंगे। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने डीएमएसआरडीई टीम को इस निर्माण के लिए बधाई दी।

आपको बता दें कि कानपुर में पांच डिफेंस फैक्ट्रियां स्थित हैं, जो एक से एक नायाब उपकरण बनाती है। जो सेना के तीनों अंगों को युद्ध क्षेत्र में और कौशलता प्रदान करने में सहायता देता है। कानपुर स्थित डीआरडीओ ने सेना के लिए प्रयोग में ली जाने वाली हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट के निर्माण से अपने नाम एक और उपलब्धि हासिल कर ली है।बता दें कि कानपुर स्थित डीआरडीओ भारतीय सेना के जखीरे में जल्द ही शामिल होने जा रहे पिनाका गाइडेड रॉकेट मिसाइल के स्टेबलाइजर का निर्माण कर रहा है, जो इस मिसाइल को सही दिशा दिखाने में मदद करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×

Powered by WhatsApp Chat

× How can I help you?