gorakhpur incharge

गोरखपुर में बदमाशों के हौसले पूरी तरह से बुलंद है। नवागत एसएसपी दिनेश कुमार पी को बदमाशों ने फिर खुली चुनौती देते हुए भाजपा के सेक्टर (BJP’s Sector) प्रभारी की गोली मार कर हत्या कर दी। गौरतलब है कि गगहा थाना क्षेत्र में दो दिन पहले एक दुकानदार शिवशंभू मौर्य और उसके कर्मचारी संजय पाण्‍डेय की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी। इसके बाद बदमाशों ने गुलरिहा थाना क्षेत्र के जेमिनी पैराडाइज के पास रहने वाले भाजपा के सेक्टर प्रभारी और नारायणपुर गांव के पूर्व प्रधान बृजेश सिंह (55 वर्ष) की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद बदमाश फरार हो गए।

भाजपा (BJP’s Sector) नेता प्रधानी के चुनाव की तैयारी कर रहे थे। हमलावरों ने वारदात को उस समय अंजाम दिया गया जब वे अपने फार्म हाउस के पास पहुंचे थे। बदमाशों ने उन्हें सिर, सीने और पेट में तीन गोलियां मारी, गोली लगते ही घटनास्थल पर उनकी मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के पास बाइक सवार बदमाश फरार हो गए। हमलावरों की संख्या तीन बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलने के बाद एसएसपी दिनेश कुमार पी समेत तमाम आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए।

उन्होंने मृतक के परिजनों और फार्म हाउस पर काम करने वाले नौकरों से भी पूछताछ की है। हैरत की बात यह है कि घटना के ठीक पहले ही करवा चौथ पर लगे सीसीटीवी कैमरे को बंद कर दिया गया था, जबकि कैमरा हमेशा ऑन रहता था। फार्म हाउस पर रहने वाले महिला और पुरुष कर्मचारियों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है। कुछ दिन पूर्व बृजेश का एक प्रापर्टी डीलर से विवाद भी हुआ था। पूर्व प्रधान बृजेश सिंह की हत्या को फिलहाल चुनावी रंजिश के साथ ही प्रापर्टी के विवाद से भी जोड़कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

gorakhpur station

कुछ दिन पहले उनका प्रापर्टी को लेकर विवाद हुआ था। साथ ही अच्छे जनाधार की वजह से इस बार उनकी प्रधानी भी तय मानी जा रही थी।मिली जानकारी के अनुसार भाजपा (BJP’s Sector) नेता मूल रूप से वाराणसी के ढेबरूवा के रहने वाले थे। उनके पिता गुप्तेश्वर सिंह पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के तौर पर गोरखपुर में तैनात थे। यहीं पर नौकरी के दौरान उन्होंने मेडिकल कालेज के पास मोगलहा में मकान बनवाया था। वह 1972 में गुलरिहा के थानेदार भी रहे और 1987 में गुलरिहा थाने से ही वह रिटायर हो गए थे। उन्होंने गुलरिहा थाने से कुछ दूरी पर स्थित नारायनपुर गांव में भी मकान बनवाया और जमीन खरीदी।

गुप्तेश्वर सिंह का इलाके में काफी नाम था इसका उनके परिवार को फायदा भी मिला। बृजेश सिंह 2010 में नारायनपुर गांव से प्रधान थे. पिछली बार की सीट पिछड़ी के लिए आरक्षित हो गई थी, इस बार फिर नारायनपुर गांव की प्रधानी की सीट अनारक्षित हुई है, तो वह चुनाव की तैयारियों में जुट गए थे। बृजेश सिंह की मां भी बीडीसी सदस्य रह चुकी हैं. वह भी इस बार बीडीसी के लिए पर्चा ली थीं। शनिवार को ही मां और बेटे का पर्चा दाखिला होना था। बृजेश सिंह की पत्नी मेडिकल कालेज में कर्मचारी हैं। बृजेश सिंह की मेडिकल कालेज के पास मेडिकल स्टोर की दुकान भी है, दुकान को उन्होंने किसी और को चालने के लिए दिया है। बृजेश सिंह के छह भाई और एक बहन थे। वह भाइयों में चौथे नम्बर पर थे। पांच साल पहले उनके पिता का देहांत हो चुका है। बृजेश सिंह एक बेटी और दो बेटे के पिता थे।

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