कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया कि महामारी के दौरान जिन बच्चों ने अपने माता-पिता खो गए हैं, उनका दाखिला नवोदय विद्यालय में कराया जाए। उन्होंने लिखा, “मैं आपसे अनुरोध करने के लिए लिख रहा हूं कि आप उन बच्चों को नवोदय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दिए जाने पर विचार करें, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण माता-पिता या माता-पिता में से किसी एक कमाने वाले को खो दिया है।

मुझे लगता है कि एक राष्ट्र के रूप में, हम उनके ऋणी हैं। उन्हें उनके साथ जो अकल्पनीय त्रासदी हुई है, उसके बाद उन्हें मजबूत भविष्य की उम्मीद दें।” सोनिया ने कहा कि महामारी से हुई तबाही और प्रभावित परिवारों द्वारा झेली जा रही दिल दहला देने वाली त्रासदियों के बीच, छोटे बच्चों के माता-पिता में से कोई एक या दोनों को कोविड-19 के कारण खोने की खबर सबसे मार्मिक है।

बच्चों को नुकसान के आघात के साथ छोड़ दिया जाता है और स्थिर शिक्षा या भविष्य के लिए कोई सहयोग नहीं मिलता है।सोनिया गांधी ने पत्र के माध्यम से बताया कि देश में 661 नवोदय स्कूल हैं जिनमें ऐसे पीड़ित बच्चों की पढ़ाई कराई जा सकती है।

आपको बता दें कि देश के कई राज्यों में कोरोना महामारी से हुई मौतों के बाद मुआवजे का ऐलान किया गया है. साथ माता-पिता को खोने वाले बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए कदम उठाए जाने की बात भी कही गई है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि जिन परिवारों में कोरोना से किसी भी सदस्य की मौत हुई है उनके परिजनों को 50 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा. वहीं जिन बच्चों के माता-पिता का कोविड महामारी से निधन हुआ है उन्हें 25 साल तक ढाई हजार रुपए मदद के तौर पर मिलेंगे।

वहीं मध्य प्रदेश में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना महामारी से असहाय हुए बच्चों को पेंशन देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण की वजह से कई परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है. कुछ परिवार ऐसे हैं, जिनमें मासूम बच्चों के सिर से अपने अभिभावकों का साया उठ गया है।

ऐसे बच्चे जिनके परिवार से पिता, अभिभावक का साया उठ गया, घर में कोई कमाने वाला नहीं है, ऐसे परिवारों को पांच हजार रुपये प्रति माह पेंशन दी जाएगी.’’

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