मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के लिए अब नई मुसीबत खड़ी हो रही है, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को उनके खिलाफ एक जूनियर अधिकारी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया। होम गार्डस के मौजूदा कमांडेंट जनरल, सिंह ने पहले मुंबई और ठाणे दोनों के शहर के पुलिस प्रमुख के रूप में कार्य किया है और दो महीने से अधिक समय से चिकित्सा अवकाश पर हैं।

मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर अनूप डांगे की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सिंह के रिश्तेदार होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और उन्हें बहाल करने के लिए 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। एसीबी ने पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी के खिलाफ खुली जांच के लिए राज्य सरकार की मंजूरी मांगी थी। डांगे, जो पहले गामदेवी पुलिस स्टेशन और बाद में मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष (दक्षिण क्षेत्र) से जुड़े थे, को सिंह के कार्यकाल के दौरान निलंबित कर दिया गया था।

उन्होंने अपनी विस्तृत शिकायत में कहा कि 2019 में एक बार मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद सिंह ने उनके निलंबन का आदेश दिया था और उन पर कुछ तत्वों को माफिया लिंक से बचाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया था, जब वह एसीबी के डीजी थे। पिछले सोमवार को राज्य सरकार की ओर से हरी झंडी दिए जाने के बाद एसीबी अब सिंह को अपना बयान दर्ज कराने और गृह विभाग को खुली जांच पर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए तलब कर सकती है।

विवादास्पद सिंह के पास पहले से ही ठाणे के पुलिस प्रमुख के रूप में की गई कथित गलतियों के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है और उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास लगाए गए एसयूवी से जिलेटिन की छड़ें बरामद होने और वाहन मालिक मनसुख हिरन की मौत से संबंधित मामलों में गवाह के रूप में नामित किया गया है। राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख को निशाना बनाकर लिखा गया उनका सनसनीखेज लेटर-बम अप्रैल में आने के बाद सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी सरकार को शर्मिदा होना पड़ा था। इससे पहले, केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय ने उनके बयान दर्ज किए हैं।

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