मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल में बाढ़ मुसीबत बनकर आई, गांव के बाद गांव उजड़ गए, अधोसंरचना तबाह हो गई, लोगों की जिंदगी बचाना मुश्किल हो गया। अब स्थितियां सुधरीं तो बाढ़ के कारण बदसूरत हो चुकी तस्वीर को दुरुरूत करने के प्रयास शुरु हो गए हैं। प्रभावितों को मदद की मुहिम जारी है तो वहीं बिगड़ चुकी व्यवस्थाओं को सुधारा जा रहा है। ग्वालियर-चंबल इलाके के दतिया, गुना, अशोकनगर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुर में बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है।

इन जिलों के सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां मकान मलबे में बदल गए हैं, खेतों में पानी भरा है, मवेशियों का कोई अता-पता नहीं है। लोगों को भी राहत शिविरों में समय बिताना पड़ा है। जब गांवों तक पानी पहुंचा था तो किसी को नाव के सहारे तो किसी को हेलीकॉप्टरसे सुरक्षित निकाला गया। पहले लोगों को जान बचाने की चिंता थी तो अब जिंदगी चलाने की चिंता सताने लगी है। सरकार ने बारिश और बाढ़ में सबकुछ गंवा देने वालों के लिए अभियान छेड़ रखा है, अनाज बांटा जा रहा है, आर्थिक मदद दी जा रही है तो वहीं नुकसान का आंकलन भी शुरु हो गया है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सभी कलेक्टर्स को निर्देशित किया है कि अतिवृष्टि एवं बाढ़ के कारण नगरीय क्षेत्रों में निवासरत आर्थिक रूप से कमजोर रहवासियों के क्षतिग्रस्त आवासों का सर्वे कर जल्द जानकारी भेजें।

ऐसे आवासहीन रहवासी जो कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के बीएलसी घटक अन्तर्गत पात्रता की श्रेणी में आते हैं, उनका सर्वे कर पात्रतानुसार प्रतिवेदन तैयार करने के निर्देश पहले ही नगरपालिका अधिकारियों को दिये जा चुके हैं। नगरीय निकाय तथा राजस्व विभाग की संयुक्त टीम का गठन कर पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर पात्रता सूची 17 अगस्त तक भेजने के निर्देश दिये गए हैं। साथ ही सर्वेक्षण कार्य की प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। बारिश और बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान श्योपुर जिले में हुआ है। यहां के 584 गांव में बिजली व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई थी, अब तक 562 गांवों में बिजली पहुंचाई गई है।

शेष 22 गांवों में बिजली बहाल करने के प्रयास जारी हैं। बिजली व्यवस्था के अंतर्गत शेष गांवो में खम्बे, तार, ट्रांसफारमर लगाने का कार्य चल रहा है। श्योपुर कलेक्टर शिवम वर्मा के मुताबिक बाढ़ प्रभावित गांवों में जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक मदद मुहैया कराई जा रही है। सभी पटवारी बाढ़ क्षेत्रों के सर्वे कार्य को तीन दिवस में पूरा करने को कहा गया है। जिले में अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा की राशि प्रभावितों के खातों में भेजी जा चुकी है। सर्वे की सूची ग्राम सभा में अनुमोदित की जायेगी।

साथ ही उसको ग्राम पंचायत पर चस्पा किया जायेगा। श्योपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के उपचार के लिए चिन्हित गांव में 99 कैम्प आयोजित किये जा चुके हैं। कैम्पों का आयोजन प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर जारी है। यहां बड़ी संख्या मंे जानवरों की मौत भी हुई है, जिसके कारण बीमारियां फैलने का भी खतरा बना हुआ है। यही कारण है कि यहां सफाई अभियान जोरों पर चलाया जा रहा है। प्रदेश में बाढ़ से बचाव कार्य में 8832 व्यक्तियों को बचाया गया तथा 32 हजार व्यक्तियों को सुरक्षित राहत कैम्पों में पहुंचाया गया है। वहीं टास्क फोर्स समिति के सभी 12 विभाग राहत और पुनर्वास के काम में लगे हुए हैं।

जिनके मकान क्षतिग्रस्त हो गये हैं, उन्हें छह-छह हजार रुपए की तात्कालिक राहत दी जा रही है, वहीं सर्वे पूरा होने के बाद मकान के लिए एक लाख 20 हजार रुपए की राशि भी दी जाएगी। लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि बाढ़ से 189 छोटे पुल-पुलिया, सात बड़े पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकार ने भले ही बाढ़ प्रभावितों को मदद के निर्देश जारी किए हैं, मगर कई स्थानों पर पीड़ितों को मदद नहीं मिल रही है और उनका गुस्सा भी फूट रहा है। पीड़ित परिवार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। शिवपुरी जिले के बैराड़ क्षेत्र के एंेचवाड़ा गांव के लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।

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